
किसी खूबसूरत पहाड़ी के नीचे एक बड़ा सा बगीचा था। वहाँ मोंटी नाम का एक बंदर रहता था जो अपनी फुर्ती के लिए मशहूर था। उसी बगीचे के बरामदे में शेरू नाम का एक कुत्ता रहता था, जिसका एकमात्र शौक था—दिन भर सोना।
शेरू का बेमिसाल आलस

मोंटी चाहता था कि शेरू उसके साथ पकड़म-पकड़ाई खेले, लेकिन शेरू इतना आलसी था कि वह अपनी पूंछ पर बैठी मक्खी उड़ाने के लिए भी किसी और का इंतज़ार करता था। मोंटी कभी शेरू के कान में फुसफुसाता, तो कभी उसके ऊपर से छलांग लगाता, पर शेरू बस एक लंबी जम्हाई लेता और करवट बदल लेता।
बगीचे के मालिक को अक्सर चिंता होती थी, “अगर कभी चोर आए, तो क्या यह आलसी शेरू घर की रखवाली कर पाएगा?”
खतरे की वह काली रात

एक रात, जब चारों तरफ सन्नाटा था, दो शातिर चोर दीवार फांदकर बगीचे में घुस आए। उन्होंने देखा कि रखवाली करने वाला कुत्ता (शेरू) तो गहरी नींद में है। चोरों ने कीमती पौधों के गमले और औजार समेटना शुरू कर दिया।
पेड़ के ऊपर से मोंटी यह सब देख रहा था। उसने सोचा कि अगर उसने शोर मचाया तो चोर उसे नुकसान पहुँचा सकते हैं। उसने शेरू को जगाने के लिए उस पर कच्चे आम फेंके, लेकिन शेरू तो खर्राटे भरने में मगन था।

मोंटी की चतुराई और शेरू का साहस

अंत में, मोंटी ने एक तरकीब सोची। उसने बगीचे में रखी लोहे की बाल्टियों को एक के ऊपर एक जोर से गिरा दिया। खड़खड़ाहट की आवाज़ इतनी तेज थी कि शेरू की नींद उड़ गई। सामने अजनबियों को देखकर शेरू का सोया हुआ रक्षक जाग गया। उसने ऐसी भयानक दहाड़ मारी कि चोरों के हाथ-पाँव फूल गए और वे सब कुछ छोड़कर दुम दबाकर भागे।
अगले दिन मालिक ने मोंटी को मीठे केले और शेरू को बड़ा सा बिस्कुट इनाम में दिया। शेरू समझ गया था कि मोंटी की वजह से आज उसकी लाज बच गई।
कहानी की सीख (Moral of the Story)
इस कहानी से हमें यह बड़ी शिक्षा मिलती है कि “समय रहते जाग जाना ही समझदारी है।” जरूरत से ज्यादा आलस न केवल हमें कमजोर बनाता है, बल्कि हमारे अपनों को भी खतरे में डाल सकता है।
So nice of you all stories…best of luck for next store’s