एक समय की बात है, एक घने और सुंदर जंगल में एक बहुत ही समझदार कबूतर रहता था। उसका नाम पीकू था। पीकू एक ऊंचे बरगद के पेड़ पर अपना घोंसला बनाकर बड़ी शांति से रहता था।

चालाक बिल्ली की बुरी नज़र

उसी जंगल में एक बहुत ही चालाक और भूखी बिल्ली भी रहती थी। उसकी नज़र कई दिनों से पीकू कबूतर पर थी। वह किसी भी तरह पीकू को अपना शिकार बनाना चाहती थी, लेकिन पीकू हमेशा पेड़ की ऊँची डालियों पर ही रहता था जहाँ बिल्ली पहुँच नहीं सकती थी।
बिल्ली की मीठी चाल

एक दिन पीकू पेड़ की थोड़ी नीची डाली पर बैठा था। बिल्ली ने मौका देखा और पेड़ के नीचे आकर बड़ी मीठी आवाज़ में बोली, “अरे पीकू भाई! कैसे हो? क्या तुमने आज की सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी सुनी? जंगल के राजा ने एक नया नियम बनाया है। अब से कोई भी जानवर किसी दूसरे जानवर को नहीं मारेगा। हम सब अब पक्के दोस्त हैं। नीचे आ जाओ, हम गले मिलकर इस दोस्ती का जश्न मनाते हैं!”
कबूतर की चतुराई

पीकू बहुत चतुर था। वह तुरंत समझ गया कि यह चालाक बिल्ली की कोई नई चाल है। उसने घबराने के बजाय अपनी बुद्धि का इस्तेमाल किया।
पीकू ने मुस्कुराते हुए कहा, “वाह बिल्ली मौसी यह तो बहुत ही अच्छी ख़बर है। मुझे दूर से कुछ शिकारी कुत्ते इसी तरफ दौड़ते हुए आते दिखाई दे रहे हैं। शायद वे भी हमारे साथ इस नई दोस्ती का जश्न मनाने आ रहे हैं!”
बिल्ली की हार
‘शिकारी कुत्तों’ का नाम सुनते ही चालाक बिल्ली के पसीने छूट गए। वह घबराकर बोली, “अरे बाप रे! शायद उन कुत्तों ने अभी तक जंगल का यह नया नियम नहीं सुना होगा। मुझे यहाँ से जाना चाहिए!” इतना कहकर बिल्ली वहाँ से दुम दबाकर भाग गई। पीकू ने अपनी समझदारी से अपनी जान बचा ली।
कहानी की सीख (Moral of the Story)
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि “मुसीबत के समय कभी घबराना नहीं चाहिए और अपनी बुद्धि का सही इस्तेमाल करना चाहिए।” झूठे और चालाक लोगों की मीठी बातों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए।