जब एक नन्ही मधुमक्खी ने तोड़ा विशाल भालू का घमंड जानिए कैसे भोलू को मिला शहद का ‘कड़वा’ सबक।

शहद का शौकीन भोलू भालू

एक बहुत बड़ा और सुंदर जंगल था, जहाँ भोलू नाम का एक भालू रहता था। भोलू स्वभाव से तो अच्छा था, लेकिन वह बहुत जिद्दी और खाने का बेहद शौकीन था। उसे जंगल की हर मीठी चीज़ पसंद थी, लेकिन उसका सबसे पसंदीदा खाना था—शहद

एक दोपहर, भोलू शहद की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था। तभी उसकी नज़र एक ऊंचे पेड़ पर लगे एक बड़े से मधुमक्खी के छत्ते पर पड़ी। छत्ते से टपकती शहद की बूंदों को देखकर भोलू के मुँह में पानी आ गया।

नन्ही मधुमक्खी की चेतावनी

भोलू पेड़ के पास पहुँचा और छत्ते को हाथ लगाने ही वाला था कि तभी एक नन्ही मधुमक्खी उड़ती हुई आई। उसने विनम्रता से कहा, “भालू भाई, यह हमारा घर है और हम इसमें कड़ी मेहनत से शहद इकट्ठा करती हैं। कृपया इसे नुकसान न पहुँचाएँ।”

लेकिन घमंडी भोलू ने उसकी बात अनसुनी कर दी। उसने गुस्से में कहा, “तुम इतनी छोटी सी जीव मुझे सिखाओगी कि मुझे क्या करना चाहिए? हटो यहाँ से!” और उसने मधुमक्खी को मारने के लिए हाथ चलाया। मधुमक्खी ने फुर्ती से उसे काट लिया और छत्ते के अंदर चली गई।

जब गुस्सा पड़ा भारी

मधुमक्खी के काटने से भोलू को बहुत दर्द हुआ। अब वह गुस्से से पागल हो गया। उसने आओ देखा न ताओ, पास ही पड़ी एक भारी लकड़ी उठाई और छत्ते पर दे मारी। भोलू को लगा कि वह छत्ता तोड़कर सारा शहद खा जाएगा, लेकिन उसने गलत अंदाज़ा लगाया था।

छत्ता टूटते ही सैकड़ों मधुमक्खियां एक साथ बाहर निकल आईं। उन्होंने मिलकर भोलू पर हमला बोल दिया। भोलू यहाँ-वहाँ भागने लगा, लेकिन मधुमक्खियां उसका पीछा नहीं छोड़ रही थीं।

बचाव और पछतावा

अंत में, अपनी जान बचाने के लिए भोलू पास ही की एक नदी में कूद गया। वह काफी देर तक पानी के अंदर रहा और सिर्फ अपनी नाक बाहर निकाल कर सांस लेता रहा। जब मधुमक्खियां वापस चली गईं, तब भोलू बाहर निकला। उसका शरीर सूज गया था और उसे अपनी गलती का एहसास हो चुका था। उसने समझ लिया कि किसी को छोटा समझकर उसे परेशान करना बहुत भारी पड़ सकता है।

कहानी की शिक्षा (Moral of the Story)

“गुस्सा और घमंड हमेशा नुकसान ही पहुँचाते हैं। साथ ही, किसी को छोटा समझकर उसका अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि एकता में बहुत बड़ी शक्ति होती है।”

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