भूमिका – शक्तिशाली शेर (Introduction – The Powerful Lion)

एक बहुत बड़ा और हरा-भरा जंगल था, जहाँ शेरू नाम का एक शेर रहता था। वह जंगल का राजा था। उसकी दहाड़ इतनी ज़बरदस्त थी कि पूरा जंगल हिल उठता था। जब वह दहाड़ता था, तो पक्षी उड़ जाते थे और जानवर अपनी गुफाओं में छिप जाते थे। शेरू को अपनी ताकत और अपनी आवाज़ पर बहुत गर्व था।
घटना – दहाड़ खोना (The Incident – Losing the Roar)

लेकिन एक दिन एक अजीब घटना घटी। शेरू सोकर उठा और उसने रोज़ की तरह दहाड़ने की कोशिश की। लेकिन यह क्या? उसके मुँह से ज़ोरदार दहाड़ की जगह एक हल्की सी, पतली ‘मीं-मीं’ जैसी आवाज़ निकली, जैसे कोई छोटी बिल्ली बोल रही हो। वह चौंक गया। उसने बार-बार कोशिश की, अपना पूरा ज़ोर लगाया, लेकिन आवाज़ नहीं लौटी।
परिणाम – अनादर और अलगाव (The Aftermath – Disrespect and Isolation)

जल्दी ही यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई कि “राजा अपनी दहाड़ खो चुके हैं।” बस फिर क्या था? जानवरों के मन से शेर का डर ख़त्म होने लगा। बंदर पेड़ों से कूदकर उसे परेशान करने लगे, हिरण उसके सामने से बेखौफ गुज़रने लगे। शेरू को बहुत बुरा लगा। उसे लगा कि बिना दहाड़ के उसकी कोई इज़्ज़त नहीं है। वह दुखी होकर एक कोने में बैठ गया।
हस्तक्षेप – चुहिया का आगमन (The Intervention – The Mouse Arrives)

उसी समय, एक छोटी सी बहादुर चुहिया उसके पास आई। उसने शेर से पूछा, “महाराज, आप इतने उदास क्यों हैं?” शेर ने अपनी टूटी आवाज़ में पूरी बात बताई। चुहिया डरी नहीं, उसने कहा, “मुझे एक मौका दीजिये।” शेर ने हताशा में अपना विशाल मुँह खोला। चुहिया अंदर गई और देखा कि गले में मांस की एक छोटी सी हड्डी फँसी हुई थी।
बचाव – हड्डी निकालना (The Rescue – Extracting the Bone)
चुहिया ने अपने तेज़ दाँतों से उसे कुतरकर बाहर निकाल दिया।

हड्डी निकलते ही शेरू को राहत मिली। उसने एक गहरी साँस ली और ज़ोर से दहाड़ा—”रोआआआार!” उसकी भयानक दहाड़ से पूरा जंगल गूंज उठा। सारे जानवर फिर से डरकर कांपने लगे।
शेरू को अपनी दहाड़ वापस मिल गई थी। उसने उस छोटी सी चुहिया का दिल से शुक्रिया अदा किया। उस दिन उसे एक बड़ी सीख मिली। उसने जान लिया कि सच्चा सम्मान सिर्फ डराने से नहीं मिलता, और कभी-कभी सबसे छोटे जीव भी वह काम कर सकते हैं जो सबसे बड़े और बलवान जानवर नहीं कर पाते।
