लालची बंदर और केले का पेड़

लालची बंदर और केले का पेड़: एक छोटी और शिक्षाप्रद कहानी

लालची बंदर और केलेका पेड़ की यह कहानी हमें जीवन का एक बहुत बड़ा सबक सिखाती है। अक्सर लोग लालच में आकर वह भी खो देते हैं जो उनके पास होता है। आइए जानते हैं मोंटू बंदर के साथ क्या हुआ।

1. मोंटू की अनोखी खोज

सुंदरवन के घने जंगल में मोंटू नाम का एक बंदर रहता था। मोंटू बहुत फुर्तीला था, लेकिन वह बहुत लालची भी था। एक सुबह, मोंटू जंगल के एक सुनसान हिस्से में जा पहुँचा। वहाँ उसे एक विशाल केले का पेड़ दिखाई दिया। वह पेड़ मीठे और पीले केलों से लदा हुआ था। मोंटू की आँखों में चमक आ गई। उसने सोचा, “इतने सारे केले! अगर मैं इन्हें छोड़ दूँ, तो दूसरे बंदर इन्हें खा जाएंगे।”

2. लालच का बुरा परिणाम

मोंटू ने पहले पेट भरकर केले खाए। फिर उसके मन में लालच आ गया। उसने सोचा कि वह सारे केलों को अपने घर ले जाएगा। उसने बहुत सारे केलों के गुच्छे तोड़ना शुरू कर दिया। मोंटू ने दोनों हाथों में गुच्छे दबाए और एक गुच्छा अपनी पूंछ में लपेट लिया।

वह केलों के बोझ से बहुत भारी हो गया था। जैसे ही मोंटू ने एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर छलांग लगाई, उसका संतुलन बिगड़ गया। वह सीधे नीचे गिरा और केलों के भारी ढेर के नीचे दब गया। मोंटू को बहुत चोट लगी और वह हिल भी नहीं पा रहा था।

3. गप्पूदादा की सीख

तभी वहाँ से गप्पू दादा (एक समझदार कछुआ) गुज़र रहे थे। उन्होंने मोंटू की आवाज़ सुनी और उसे केलों के नीचे से बाहर निकाला। मोंटू बहुत शर्मिंदा था। गप्पू दादा ने प्यार से समझाया, “मोंटू, देखा? तुमने इतने केले तोड़े कि तुम उन्हें उठा भी नहीं पाए। अगर तुम सिर्फ ज़रूरत के हिसाब से केले लेते, तो आज तुम सुरक्षित होते।”

मोंटू को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझ लिया कि लालच केवल मुसीबत लाताहै, खुशी नहीं।

कहानी की सीख(Moral)

“लालच बुरी बलाहै।” हमें हमेशा अपनी ज़रूरत के अनुसार ही चीज़ें लेनी चाहिए।

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