🐺🥁लालचीगीदड़औरढोलकीकहान

🌳जंगलमेंअजीबआवाज :

बहुत समय पहले एक घने जंगल में एक गीदड़ रहता था। वह बहुत भूखा और थोड़ा लालची भी था।

एक दिन वह खाने की तलाश में जंगल में घूम रहा था। तभी उसे एक अजीब सी आवाज सुनाई दी—“ढम-ढम… ढम-ढम…”

गीदड़ डर गया। उसने पहले कभी ऐसी आवाज नहीं सुनी थी।

वह सोचने लगा, “यह कौन सा बड़ा और खतरनाक जानवर है?”

🤔डरऔरजिज्ञासा :

गीदड़ डर के कारण छिप गया, लेकिन उसकी जिज्ञासा भी बढ़ती जा रही थी।

कुछ देर बाद उसने सोचा, “मुझे सच पता करना चाहिए। शायद यह आवाज किसी खाने से जुड़ी हो।”

धीरे-धीरे वह आवाज की दिशा में बढ़ने लगा।

🥁ढोलकारहस्य :

थोड़ी दूर जाने पर उसने देखा कि वहाँ कोई जानवर नहीं था, बल्कि एक बड़ा सा ढोल पड़ा था।

हवा चलने पर पेड़ की सूखी डालियाँ ढोल से टकरा रही थीं, जिससे “ढम-ढम” की आवाज आ रही थी।

गीदड़ समझ गया कि यह कोई जानवर नहीं, बल्कि ढोल है।

😋 लालच की शुरुआत

गीदड़ खुश हो गया और सोचने लगा,

“यह ढोल इतना बड़ा है, इसके अंदर जरूर बहुत सारा मांस होगा।”

उसके मुँह में पानी आ गया।

🪓 ढोल को फाड़ना

गीदड़ ने अपने तेज दाँतों से ढोल को काटना शुरू किया।

वह पूरे जोश से ढोल को फाड़ने लगा।

काफी मेहनत के बाद ढोल फट गया।

😞 निराशा

लेकिन जैसे ही ढोल फटा, गीदड़ हैरान रह गया।

अंदर कुछ भी नहीं था—न मांस, न खाना!

वह बहुत निराश हो गया।

📌 अंत और सीख

गीदड़ को अपनी गलती का एहसास हुआ।

वह समझ गया कि उसने बिना सोचे-समझे लालच किया।

वह उदास होकर वहाँ से चला गया।

📌कहानीकीसीख(Moral of the Story) :

लालच बुरी बला है।
बिना सोचेसमझे किसी चीज के पीछे नहीं भागना चाहिए।

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