🐒 चतुर बंदर और लालची लकड़बग्घा की कहानी

बहुत समय पहले की बात है। एक सुंदर और हरे-भरे जंगल में एक बड़ा सा आम का पेड़ था। उस पेड़ पर एक चतुर बंदर रहता था। उसे पेड़ पर चढ़ना और मीठे आम खाना बहुत पसंद था।
जब भी आम पकते, बंदर खुशी-खुशी उन्हें खाता और पेड़ की डालियों पर कूदता-फाँदता रहता।
उसी पेड़ के पास एक लकड़बग्घा भी रहता था। वह बहुत आलसी और लालची था। उसे बिना मेहनत किए स्वादिष्ट खाना चाहिए था।
हर दिन वह पेड़ के नीचे खड़ा होकर बंदर को आम खाते हुए देखता रहता।
आम का स्वाद

एक दिन लकड़बग्घा ने सोचा कि उसे भी आम खाने चाहिए।
वह बंदर के पास गया और मीठी आवाज में बोला,
“बंदर भाई, तुम बहुत भाग्यशाली हो। तुम्हें रोज इतने मीठे आम खाने को मिलते हैं। क्या तुम मुझे भी कुछ आम दे सकते हो?”
बंदर दयालु था। उसने पेड़ से कुछ पके हुए आम तोड़े और नीचे फेंक दिए।
लकड़बग्घा ने आम खाए तो वह बहुत खुश हो गया। आम बहुत मीठे थे।
अब वह रोज बंदर के पास आने लगा और आम माँगने लगा।
लालच बढ़ गया

कुछ दिनों बाद लकड़बग्घा के मन में लालच आ गया।
उसने सोचा,
“अगर बंदर नीचे आ जाए तो मैं उसे पकड़ सकता हूँ और फिर सारे आम अकेले खा सकता हूँ।”
एक दिन उसने बंदर से कहा,
“मित्र, जंगल के उस पार एक और पेड़ है। वहाँ के आम इससे भी ज्यादा मीठे हैं। अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें वहाँ ले जा सकता हूँ।”
बंदर की समझदारी

बंदर बहुत समझदार था। उसे लकड़बग्घा की बात पर थोड़ा शक हुआ।
फिर भी वह सच जानना चाहता था।
वह धीरे-धीरे पेड़ से नीचे उतरा, लेकिन बहुत सावधान था।
जैसे ही बंदर जमीन पर पहुँचा, लकड़बग्घा ने उसे पकड़ने की कोशिश की।
लेकिन बंदर बहुत तेज था। वह तुरंत उछलकर वापस पेड़ पर चढ़ गया।
लकड़बग्घा को सबक

पेड़ पर बैठकर बंदर मुस्कुराया और बोला,
“लकड़बग्घा, मैं तुम्हारी चाल समझ गया था। दोस्ती में धोखा नहीं देना चाहिए।”
लकड़बग्घा बहुत शर्मिंदा हो गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।
उस दिन के बाद उसने कभी बंदर को धोखा देने की कोशिश नहीं की।
बंदर फिर से खुशी-खुशी पेड़ पर रहने लगा।
📌 कहानी की सीख (Moral of the Story)

लालच करना और धोखा देना गलत है।
समझदारी और सावधानी हमें मुसीबत से बचाती है।